LearnWave
Learn it. Master it.

पहली बूँद

नगाड़ा

नगाड़े के बारे में जानो, जिसे कविता में बादल बजाते हैं।

कविता 'पहली बूँद' में बादल नगाड़े बजाकर धरती की तरुणाई को जगाते हैं। अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 31 खोलो और 'इन्हें भी जानें' पढ़ो। वहाँ किताब नगाड़े के बारे में बताती है।

नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र (बाजा) है। कुछ वाद्ययंत्र उन पर चोट करके बजाए जाते हैं — जैसे ढोलक, नगाड़ा, डमरू और डफली। नगाड़े को भी डंडियों से चोट करके बजाया जाता है। (बाँसुरी या शहनाई जैसे बाजे फूँक कर बजते हैं — वे इस समूह में नहीं हैं।)

नगाड़ा प्रायः लोक उत्सवों के अवसर पर बजाया जाता है। होली जैसे लोकपर्व पर गाए जाने वाले गीतों में भी इसका प्रयोग होता है।

एक रोचक बात: नगाड़े जोड़े में भी बजाए जाते हैं। उस जोड़े में एक नगाड़े की ध्वनि (आवाज़) पतली होती है और दूसरे की मोटी। दोनों मिलकर ज़ोरदार, गूँजती आवाज़ बनाते हैं — बिलकुल बादलों के गरजने जैसी।

नगाड़ा भारत का पारंपरिक वाद्ययंत्र है जो चोट करके बजाया जाता है (ढोलक, डमरू, डफली की तरह); यह प्रायः लोक उत्सवों पर और होली जैसे लोकपर्व के गीतों में बजता है, और जोड़े में बजाया जाता है जिसमें एक की ध्वनि पतली और दूसरे की मोटी होती है।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.