पहली बूँद
कवि गोपालकृष्ण कौल
कवि गोपालकृष्ण कौल के बारे में जानो।
अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 26 खोलो और 'कवि से परिचय' पढ़ो। कविता 'पहली बूँद' गोपालकृष्ण कौल ने लिखी है। किताब में उनके नाम के साथ ये वर्ष लिखे हैं: 1923–2007।
किताब उन्हें 'बाल साहित्यकार' कहती है — यानी ऐसे लेखक जो ख़ास तौर पर बच्चों के लिए लिखते हैं। धरती के सूखे होंठों पर पहली बूँद गिरने का जो अद्भुत दृश्य हमने कविता में पढ़ा, वह उन्हीं का रचा हुआ है।
गोपालकृष्ण कौल ने बच्चों के लिए बहुत-सी मनोरम (मन को अच्छी लगने वाली) कविताएँ लिखीं। उनकी कविताएँ तीन विषयों से जुड़ी हैं: देश-प्रेम, प्रकृति और जीव-जंतु। 'पहली बूँद' इनमें से प्रकृति वाली कविता है।
किताब उनकी एक और कविता का नाम बताती है: 'हम कुछ सीखें'। उसमें कवि कहते हैं: 'देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।' यानी हमें देश से केवल लेते ही नहीं रहना चाहिए; छोटी-छोटी अच्छी बातों से हम भी कुछ लौटा सकते हैं।
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