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रहीम के दोहे

पहेली बूझो

पाठ के अंत की पहेली बूझो।

अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 50 खोलो। पाठ 5 के अंत में 'आज की पहेली' में दो पहेलियाँ हैं। पहेली में कोई चीज़ अपने बारे में सुराग (संकेत) देती है, पर अपना नाम नहीं बताती। हमें सुरागों को जोड़कर उसका नाम बूझना होता है।

पहली पहेली के सुराग: इसका नाम केवल दो अक्षरों का है। यह खाने के काम आती है। और अगर इसके नाम को उल्टा कर दो, तो 'नाच' बन जाता है। अब सोचो: 'नाच' में दो अक्षर हैं — ना और च। इन्हें उल्टा करो तो बनता है — च, ना — 'चना'! चना सचमुच खाने के काम आता है। तो पहली पहेली का उत्तर है — चना।

दूसरी पहेली के सुराग: एक किला है जिसके केवल दो ही द्वार (दरवाज़े) हैं। उसमें लकड़ी के सैनिक रहते हैं। जब ये सैनिक दीवार से टकराते हैं, तो जल उठते हैं और रोशनी हो जाती है।

अब सोचो: कौन-सी छोटी डिबिया है जिसमें लकड़ी की तीलियाँ भरी रहती हैं? डिबिया को दोनों ओर से खिसकाकर खोला जा सकता है — ये हुए दो द्वार। तीली को डिबिया की खुरदुरी दीवार पर रगड़ो तो वह जल उठती है। तो दूसरी पहेली का उत्तर है — माचिस। लकड़ी के सैनिक हैं माचिस की तीलियाँ।

पहेली के सुरागों को जोड़कर उत्तर बूझते हैं: दो अक्षर का, खाने के काम आने वाला, उल्टा होकर 'नाच' बनने वाला — चना; दो द्वार वाला किला जिसके लकड़ी के सैनिक दीवार से टकराकर जल उठें — माचिस।

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