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रहीम के दोहे

दोहों के शब्द

दोहों में आए पुराने शब्दों के अर्थ सीखो।

अपनी किताब 'मल्हार' के पाठ 5 'रहीम के दोहे' (पृष्ठ 45) में कुछ ऐसे शब्द हैं जो आज की बोलचाल की हिंदी से थोड़े अलग हैं। रहीम ने अपने दोहे अवधी और ब्रजभाषा में लिखे थे, इसलिए कई शब्दों के रूप पुराने हैं। किताब के पृष्ठ 48 पर इनमें से कुछ शब्द दिए गए हैं। आइए, इनके अर्थ समझें।

तरुवर का अर्थ है पेड़ (वृक्ष)। सरवर का अर्थ है सरोवर, यानी तालाब। ये दोनों शब्द दूसरे दोहे में आते हैं, जहाँ पेड़ अपने फल और सरोवर अपना पानी खुद नहीं लेते। उसी दोहे में सुजान शब्द है — इसका अर्थ है सज्जन या समझदार व्यक्ति।

छिटकाय का अर्थ है झटके से। यह धागे वाले दोहे में है — प्रेम का धागा झटके से मत तोड़ो। बिपति का अर्थ है विपत्ति, यानी संकट या मुसीबत।

साँचे का अर्थ है सच्चे, और मीत का अर्थ है मित्र। आखिरी दोहे में इन्हीं शब्दों से सच्चे मित्रों की बात कही गई है। और कपाल का अर्थ है सिर — जीभ वाले दोहे में जूते कपाल को खाने पड़ते हैं।

दोहों के शब्दों के अर्थ: तरुवर = पेड़, सरवर = सरोवर (तालाब), सुजान = सज्जन या समझदार व्यक्ति, बिपति = विपत्ति (संकट), छिटकाय = झटके से, साँचे = सच्चे, कपाल = सिर, मीत = मित्र।

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