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जलाते चलो

कविता के शब्द

कविता के शब्दों के अर्थ सीखो।

अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 63 खोलो। वहाँ कविता 'जलाते चलो' के चार शब्द और उनके अर्थ मिलाने के लिए दिए गए हैं। कविता पृष्ठ 60 पर है। आओ, चारों शब्दों को समझें।

अमावस — इसे अमावस्या भी कहते हैं। यह वह तिथि है जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। इसीलिए कविता में अमावस की रात अँधेरे के लिए आई है।

पूर्णिमा — इसे पूर्णमासी भी कहते हैं। यह वह तिथि है जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है, और रात उजली होती है। कविता कहती है कि विज्ञान अमावस को भी पूर्णिमा जैसा बना सकता है।

विद्युत-दिये — विद्युत का अर्थ है बिजली। विद्युत-दिये यानी बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण।

युग — इसका अर्थ है समय या काल। युग संख्या में चार माने गए हैं: सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग। कविता कहती है कि 'युगों से' — यानी बहुत लंबे समय से — मनुष्य दिये जलाता आया है।

अमावस = जिस रात चंद्रमा दिखाई नहीं देता; पूर्णिमा = जिस रात चंद्रमा पूरा दिखता है; विद्युत-दिये = बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब; युग = समय, काल — जो चार माने गए हैं।

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