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सत्रिया और बिहू नृत्य

मूँगा सिल्क

असम के मूँगा सिल्क के बारे में जानो।

अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 92 खोलो और 'झरोखे से' में लेख 'असम का सुप्रसिद्ध मूँगा सिल्क' पढ़ो। पाठ 8 में माँ ने बताया था कि असम अपने रेशम के लिए जाना जाता है। असम के रेशम को मूँगा सिल्क भी कहते हैं। यह लेख बिमल श्रीवास्तव ने लिखा है।

लेखक कुछ साल पहले गुवाहाटी हवाई अड्डे पर काम करते थे। वहाँ वे अक्सर महिलाओं को एक खास तरह की सुंदर साड़ी पहने देखते थे। यह साड़ी हमेशा भूरे-सुनहरे रंग की और झिलमिलाती-सी होती थी। असम की एक शादी में भी उन्होंने ऐसी ही चमकीली साड़ियाँ और कुर्ते देखे। तब उन्होंने अपने एक असमी मित्र से पूछा कि यह भूरा-चमकीला कपड़ा कैसा है।

मित्र ने बताया कि यह भूरा नहीं, सुनहरा है। यह असम का प्रसिद्ध मूँगा सिल्क है, जो सभी प्रकार के रेशमों में सबसे महँगा माना जाता है। असमिया भाषा में 'मूँगा' का अर्थ है पीला या गहरा भूरा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरे संसार में यह केवल असम और देश के पूर्वोत्तर राज्यों में ही तैयार होता है।

मित्र ने इसकी एक और खूबी बताई। दूसरे रेशमी कपड़ों की तरह मूँगा सिल्क की साड़ियों को 'ड्राई क्लीन' नहीं कराना पड़ता — इन्हें घर पर ही धोया जा सकता है। और हर धुलाई के बाद इनका निखार (चमक) बढ़ता ही जाता है। इसे गर्मी हो या सर्दी, किसी भी मौसम में पहना जा सकता है।

मूँगा सिल्क असम का भूरा-सुनहरा चमकीला रेशम है, जो पूरे संसार में केवल असम और पूर्वोत्तर राज्यों में बनता है; इसे घर पर धोया जा सकता है, हर धुलाई से इसका निखार बढ़ता है, और इसे किसी भी मौसम में पहना जा सकता है।

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