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मीरा के पद

पंक्ति से पंक्ति

दोनों पदों की पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।

पृष्ठ 132 पर 'पंक्ति से पंक्ति' में दोनों पदों की पाँच पंक्तियाँ और उनके सरल अर्थ हैं:

पंक्तिसरल अर्थ
"अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल।"होंठों पर सुरीली धुनों से भरी बाँसुरी, और सीने पर वैजयंती माला सजी है
"क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल।"कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हैं, और पैरों के नूपुर मीठी आवाज़ में बोल रहे हैं
"मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल।"हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले हो
पंक्तिसरल अर्थ
"सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की।"सावन में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है
"उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की।"चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है

एक बात ध्यान दीजिए: पद की पंक्ति छोटी, और उसका सरल अर्थ लंबा। क्यों? दो कारण:

  • कवि कम शब्दों में ज़्यादा कहता है (हर कविता में ऐसा होता है)
  • ये पद 500 साल पुरानी हिंदी में हैं; कई शब्द आज बदल गए हैं
तब का शब्दआज का शब्द
अधरहोंठ
उरसीना
कटितटकमर

इसीलिए हर पंक्ति को खोलकर कहना पड़ता है।

पद की पंक्ति छोटी और उसका अर्थ लंबा — क्योंकि कवि कम में अधिक कहता है, और भाषा पाँच सौ वर्ष पुरानी है।

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