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तीन बुद्धिमान

ज्ञानेंद्रियाँ और पहेलियाँ

ज्ञानेंद्रियों के बारे में जानिए और कुछ पहेलियाँ बूझिए।

भाइयों की बात याद कीजिए: "बचपन से हमें आदत है कि हम किसी चीज़ को अपनी नज़र से नहीं चूकने देते।" तीनों भाई आसपास की हर चीज़ को ध्यान से देखते, सुनते, सूँघते और महसूस करते हैं, यानी अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का पूरा उपयोग करते हैं।

ज्ञानेंद्रियाँ पाँच होती हैं:

ज्ञानेंद्रियकाम
आँखदेखना
कानसुनना
नाकसूँघना
जीभचखना
त्वचाछूना, स्पर्श

कहानी में कौन-सी काम आईं? पैरों के निशान और घास: आँख। पेटी में लुढ़कने की आवाज़: कान। भाइयों की असली कुशलता थी, आँख और कान से मिली बातों को बुद्धि से जोड़ना।

पाठ दो खेल सुझाता है:

  • 'हाँ' या 'नहीं': एक बच्चा चुपके से किसी चीज़ का नाम लिखे; बाकी ज़्यादा से ज़्यादा 20 सवाल पूछकर उसे पहचानें, और हर जवाब बस 'हाँ' या 'नहीं' में हो
  • छूकर, सूँघकर, चखकर पहचानना: आँखों पर पट्टी बाँधकर चीज़ पहचानना

पहेली 1: "इसकी लंबी पूँछ पेड़ की शाखाओं से लिपटी रहती है। यह कीड़ों को चुपके से पकड़ता है। यह अपने आसपास में घुल-मिल जाता है और रंग बदल सकता है। इसकी तेज़ आँखें चारों ओर देख सकती हैं।" उत्तर: गिरगिट।

पहेली 2, रंगीन डिब्बे: मेज़ पर चार डिब्बे एक कतार में हैं: लाल, हरा, नीला, पीला। संकेत:

  • लाल डिब्बा नीले के पास है
  • हरा डिब्बा पीले के पास नहीं है
  • पीला डिब्बा लाल के पास नहीं है
  • हरा डिब्बा लाल के पास है

सोचिए: पीले के पास न लाल हो सकता है, न हरा, तो बचा कौन? नीला!

ज्ञानेंद्रियाँ पाँच हैं — आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा — और भाइयों की कुशलता उन्हें बुद्धि से जोड़ने में थी।

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