तीन बुद्धिमान
ऊँट का रहस्य खुलता है
जानिए कि भाइयों को ऊँट के बारे में ये सब बातें कैसे पता चलीं।
राजा ने भाइयों को निर्दोष माना और ऊँट के मालिक से कहा: "ये चोर नहीं हैं, ये बहुत बुद्धिमान लोग हैं। इनके बताए रास्ते पर जाकर अपना ऊँट खोजो।"
फिर राजा ने सबसे ज़रूरी सवाल पूछा: "तुम्हें कैसे पता चला कि उसका ऊँट खोया है, और ऊँट कैसा था?" हर भाई ने अपना सुराग बताया:
| भाई | क्या जाना | सुराग |
|---|---|---|
| बड़ा | बहुत बड़ा ऊँट गया है | धूल पर पैरों के निशान |
| बड़ा | घुड़सवार कुछ खोज रहा है | वह चारों ओर नज़र दौड़ा रहा था |
| मझला | ऊँट एक आँख से नहीं देखता | सड़क के दाईं ओर की घास चरी थी, बाईं ओर की ज्यों की त्यों |
| छोटा | ऊँट पर महिला और बच्चा थे | ऊँट के घुटने टेककर बैठने के निशान, पास में महिला के जूतों और छोटे पैरों के निशान |
बड़े भाई ने दो अलग बातें जोड़ीं: निशानों से ऊँट, और घुड़सवार के व्यवहार से यह कि उसका कुछ खोया है।
राजा ने अच्छा सवाल पूछा: "ऊँट एक आँख से देखता है, यह किसने बताया? आँख का तो सड़क पर कोई निशान नहीं होता!" मझले भाई का उत्तर बहुत चतुर था: जिस ओर ऊँट को दिखता नहीं, उस ओर की घास वह चरेगा भी नहीं!
और छोटे भाई की बात: ऊँट बैठा था, यानी कोई उतरा था; और उतरने वालों के पैरों के निशान रेत पर छप गए। बड़े जूते = महिला, छोटे पैर = बच्चा।
हर अनुमान के पीछे एक ठोस निशान था। यही है पैनी दृष्टि!
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