फूल और काँटा
कविता की रचना
कविता की रचना की एक खास बात खोजिए।
इस पंक्ति को ध्यान से देखिए: "निज सुगंधों औ निराले रंग से।" यह 'औ' क्या है? यह है 'और'! कविता में 'र' लिखा ही नहीं गया।
ऐसा क्यों? दो कारण:
- बोलचाल में भी हम कई बार शब्द की आख़िरी ध्वनि नहीं बोलते; 'और' अक्सर 'औ' जैसा सुनाई देता है
- हर पंक्ति की एक लय (ताल) होती है। एक ज़्यादा ध्वनि उसे बिगाड़ देती, इसलिए कवि ने शब्द छोटा कर लिया
ऐसी ही एक और बात: 'प्यार में डूबी तितलियों' की जगह कवि ने लिखा 'प्यार-डूबी तितलियों'। 'में' हटा दिया, और अर्थ वही रहा!
तुक: हर दूसरी पंक्ति का आख़िरी शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाला है:
- पालता – डालता
- बही – नहीं
- बसन – तन
- पिला – खिला
- शीश पर – कसर
पाठ और भी विशेषताएँ गिनाता है:
- एक ही वर्ण से शुरू होने वाले दो शब्द एक पंक्ति में साथ-साथ
- मुहावरे का प्रयोग: 'जी खिलाना'
- प्रश्न: "किस तरह कुल की बड़ाई काम दे?"
- पेड़-पौधों में इंसानों जैसे काम: फूल गोद में लेता है, रस पिलाता है
- विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग
कवि लय के लिए 'और' को 'औ' कर देता है — और हर दूसरी पंक्ति तुकांत होती है।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.