फूल और काँटा
बड़प्पन
कविता के सबसे महत्वपूर्ण शब्द 'बड़प्पन' पर सोचिए।
कविता की आख़िरी पंक्ति का सबसे ज़रूरी शब्द है 'बड़प्पन'। पृष्ठ 33 पर इसे खोलकर समझाया गया है।
बड़प्पन = बड़ा + पन। '-पन' एक प्रत्यय है, जो शब्द के अंत में लगकर उसका भाव बनाता है: बचपन, अपनापन, भोलापन, लड़कपन।
इसका अर्थ है: बड़ाई, श्रेष्ठ होने का भाव, महत्व, गौरव।
पर ध्यान दीजिए: यहाँ 'बड़ा' का अर्थ आकार में बड़ा नहीं! यह शब्द व्यक्तित्व, गुण और चरित्र की ऊँचाई के लिए आता है: "उनकी सादगी और बड़प्पन ने सबका मन जीत लिया।" जो सचमुच बड़ा है, उसे बड़ा दिखने की ज़रूरत नहीं पड़ती!
पाठ कुछ शब्द देता है; कौन-से बड़प्पन दिखाते हैं?
| बड़प्पन वाले | बड़प्पन नहीं |
|---|---|
| सहनशीलता, दया, विश्वास | अहंकार, घमंड, ईर्ष्या |
| उदारता, विनम्रता, त्याग | द्वेष, प्रतिशोध (बदला), क्रूरता |
| संतोष, समर्पण, आदर | स्वार्थ, अपमान, अविश्वास |
| सम्मान, निष्ठा, परोपकार | झूठ, अधीरता, लालच |
| सद्भावना | झगड़ालूपन |
दोनों सूचियाँ साथ पढ़िए। पहली सूची के सब गुण दूसरों की ओर मुड़े हैं (दया किसी पर, आदर किसी का)। दूसरी सूची के सब भाव अपनी ओर मुड़े हैं (घमंड अपना, लालच अपना)। बड़प्पन वही है जो खुद से बाहर देखे, जैसे कविता का फूल तितली और भौंरे की ओर देखता है।
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