पानी रे पानी
जल-चक्र की किताबी बात
अनुपम मिश्र का लेख 'पानी रे पानी' शुरू कीजिए और जल-चक्र की किताबी बात पढ़िए।
'मल्हार' का चौथा पाठ अनुपम मिश्र का लेख 'पानी रे पानी' है। यह दो सवालों से शुरू होता है: "कहाँ से आता है हमारा पानी, और फिर कहाँ चला जाता है? हमने कभी इस बारे में सोचा है? सोचा तो शायद नहीं, पर पढ़ा ज़रूर है।"
ध्यान दीजिए: पढ़ना और सोचना एक बात नहीं है! भूगोल की किताब में जल-चक्र पढ़ाया जाता है, साथ में एक सुंदर-सा चित्र भी होता है।
उस चित्र में क्या है? "सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें, और फिर बहती हुई एक नदी, और उसके किनारे बसा तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर।" (सोचिए: बड़े-बड़े शहर अक्सर नदियों के किनारे ही बसे, क्योंकि हर बस्ती को पानी चाहिए!)
"चित्र के दूसरे भाग में यही नदी चारों तरफ़ का पानी लेकर उसी समुद्र में मिलती दिखती है।" यानी जहाँ से चला था, वहीं लौट आया।
चित्र में कुछ तीर भी बने रहते हैं, जो पानी की यात्रा की दिशा दिखाते हैं। पूरा क्रम:
- समुद्र से भाप उठती है
- भाप बादल बनती है
- बादल से वर्षा होती है
- वर्षा का पानी नदी बनकर बहता है
- नदी फिर समुद्र में मिल जाती है
चक्र का अर्थ ही है: जो घूमकर वहीं लौट आए। जल-चक्र पूरा हो जाता है, और फिर से शुरू होता है।
पर लेखक तुरंत कहता है: "यह तो हुई जल-चक्र की किताबी बात।" यानी असली बात अब शुरू होगी!
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.