पानी रे पानी
पानी का अजीब चक्कर
जानिए कि हमारे घरों और शहरों में पानी का चक्कर कैसा अजीब हो गया है।
"पर अब तो हम सबके घरों में, स्कूल में, माता-पिता के दफ़्तर में, कारख़ानों और खेतों में पानी का कुछ अजीब-सा चक्कर सामने आने लगा है।"
गर्मी में क्या होता है?
- "नलों में अब पूरे समय पानी नहीं आता। नल खोलो तो पानी के बदले सूँ-सूँ की आवाज़ आती है।"
- पानी आता भी है तो बेवक़्त: कभी देर रात, कभी बहुत सबेरे
- "मीठी नींद छोड़कर घर भर की बालटियाँ, बर्तन और घड़े भरते फिरो!"
- पानी को लेकर कहीं-कहीं तू-तू, मैं-मैं (झगड़ा) भी होने लगती है
रोज़ के झगड़ों से बचने के लिए कई लोग नल के पाइप में मोटर लगवा लेते हैं। इससे कई घरों का पानी खिंचकर एक ही घर में आ जाता है। सोचिए: मेरे घर में मोटर लगी, तो मेरे घर पानी आया, पर पास के चार घरों में नहीं!
लेखक की तीखी बात: "यह तो अपने आस-पास का हक़ छीनने जैसा काम है।" और एक घर करे, तो मजबूरी मानकर और घर भी यही करने लगते हैं। पानी की कमी और बढ़ जाती है! बचने का उपाय ही समस्या बढ़ा देता है।
"शहरों में तो अब कई चीज़ों की तरह पानी भी बिकने लगा है।" (बोतल वाला पानी याद कीजिए!) यह कमी गाँव-शहरों में ही नहीं, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में भी भयानक कष्ट देती है। देश के कई हिस्सों में अकाल जैसी हालत बन जाती है।
और बरसात में? "सब तरफ़ पानी ही बहने लगता है।" घर, स्कूल, सड़कें, रेल की पटरियाँ, सब पर पानी भर जाता है। देश के कई भाग बाढ़ में डूब जाते हैं; बाढ़ न गाँवों को छोड़ती है, न मुंबई जैसे बड़े शहरों को। "कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है, सब कुछ बह जाता है।"
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