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नहीं होना बीमार

लेखक से परिचय

लेखक स्वयं प्रकाश के जीवन और उनकी रचनाओं के बारे में जानिए।

पृष्ठ 61 पर 'लेखक से परिचय'। स्वयं प्रकाश (1947–2019) हिंदी के जाने-माने लेखक थे।

"उनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों के दिलों को छू जाती हैं।" क्यों? "उन्हें पढ़ते हुए लगता है मानो वे हमारे ही जीवन की कहानियाँ हैं, हमारे ही अनुभव उन्होंने लिख दिए हैं।"

यह बात इस कहानी पर बिलकुल ठीक बैठती है। बीमारी का बहाना, पकड़े जाने का डर, भूख, और भाई को कुछ अच्छा खाते देखकर जलन: पढ़कर हर कोई कहता है, "यह तो मेरे साथ भी हुआ है!"

"उन्होंने बच्चों के लिए कई मनोरंजक कहानियाँ लिखीं, जिनमें साहसिक कारनामे, मित्रता और जीवन के छोटे-छोटे लेकिन ज़रूरी पहलू बड़ी रोचकता से आते हैं।" यह कहानी भी ऐसी ही है: न कोई बड़ा कारनामा, न कोई यात्रा; बस एक दिन, एक रजाई और एक बहाना!

"उनकी कहानियों की विशेषता: पढ़ते समय लगता है जैसे कोई पुराना मित्र बातें कर रहा हो।" इसीलिए यह कहानी 'मैं' में लिखी गई है: बच्चा हमसे सीधे बात करता है, अपने मन की बातें भी बता देता है, और अपनी ग़लती पर खुद हँसता भी है।

"उनकी कहानियाँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, सोचने-समझने के लिए नई दिशाएँ भी देती हैं।" उनकी कुछ रचनाएँ: 'मात्रा और भार', 'अगली किताब', 'ज्योति रथ के सारथी' और 'फ़ीनिक्स'।

स्वयं प्रकाश की कहानियाँ ऐसी लगती हैं जैसे कोई पुराना मित्र बातें कर रहा हो, और हमारे ही अनुभव लिखे गए हों।

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