नहीं होना बीमार
चित्रात्मक भाषा
जानिए कि चित्रात्मक भाषा कहानी को आँखों के सामने कैसे ला देती है।
पृष्ठ 65 पर 'कहानी की रचना'। यह पंक्ति फिर पढ़िए: "अस्पताल का माहौल मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे। न ट्रैफ़िक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी ... सिर्फ़ लोगों की धीमी-धीमी गुनगुन। बाक़ी एकदम शांति।"
पढ़ते ही आँखों के सामने अस्पताल का चित्र बन जाता है न? लेखन में इसे चित्रात्मक भाषा कहते हैं। लेखक रचना को रोचक बनाने के लिए चीज़ों, कामों और जगहों का विस्तार से वर्णन करते हैं।
यह चित्र कैसे बना? लेखक ने बस 'वहाँ शांति थी' नहीं कहा। उसने गिनाया कि क्या नहीं था: न ट्रैफ़िक, न धूल, न मच्छर। जो नहीं है, उसे गिनाकर जो है उसे दिखाना: चित्रात्मक भाषा की एक चतुर तरकीब!
रसोई का वर्णन भी देखिए: "अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार, ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी।" लेखक ने बस 'दाल बनी थी' नहीं कहा; बघार, धनिया, घी तक गिना दिया। इसीलिए पढ़ते समय मुँह में पानी आ जाता है!
कहानी को रोचक बनाने के और तरीक़े भी हैं:
- बच्चे का कल्पना करना (लेटे-लेटे घर और गली के लोगों के बारे में सोचना)
- पिछली बातें याद करना
- हास्य का प्रयोग
- बच्चे की सोच बदलना (बीमारी अच्छी → बीमारी बुरी)
- किसी का किसी बात से अनजान होना
- बच्चे का खुद से बातें करना ("अक्लमंद! और बनो बीमार!")
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.