नहीं होना बीमार
लेखन के अनोखे तरीक़े
लेखन के कुछ अनोखे तरीक़े सीखिए।
पृष्ठ 68 पर 'लेखन के अनोखे तरीक़े' में एक बहुत काम का अभ्यास है। पहले एक साधारण वाक्य:
"मैं बिना आवाज़ किए दरवाज़े तक गया और ऐसे झाँककर देखने लगा जिससे किसी को पता न चले कि मैं बिस्तर से उठ गया हूँ।"
वाक्य सही है, पर लंबा है, और उसमें कोई चमक नहीं। कहानी में यही बात ऐसे लिखी है:
"दबे पाँव दरवाज़े तक गया और चुपके से झाँककर देखा।"
लंबा वाक्य दस शब्दों में सिमट गया! 'दबे पाँव' और 'चुपके से', इन दो पदों ने वह सब कह दिया जो पहले वाक्य को समझाना पड़ रहा था।
साधारण बात को अलग ढंग से लिखने से लेखन सुंदर बनता है। और उदाहरण:
| साधारण वाक्य | कहानी में |
|---|---|
| ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए | हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए |
| खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे | बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे |
| वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाज़ें आ रही थीं | सिर्फ़ लोगों की धीमी-धीमी गुनगुन। बाक़ी एकदम शांति |
| बीमार लोगों के बहुत मज़े होते हैं | क्या ठाठ हैं बीमारों के भी! |
| मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ | चलो बीमार पड़ जाते हैं |
हर बार लेखक ने शब्द कम किए और असर बढ़ाया। आप भी अपने लेखन में ऐसा करके देखिए!
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