वर्षा-बहार
कविता का सौंदर्य
कविता की पंक्तियों में उसकी सुंदरता खोजिए।
पृष्ठ 89 पर 'कविता का सौंदर्य' (पाठ 3 जैसा अभ्यास)। कविता की पंक्तियों से शब्द हटाए गए हैं; मिलते-जुलते अर्थ वाले पर्यायवाची शब्द रखकर देखिए कि कौन जँचता है:
| पंक्ति | हटाया शब्द | पर्यायवाची विकल्प |
|---|---|---|
| "_____ बहार सब के, मन को लुभा रही है।" | वर्षा | बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि |
| "_____ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है।" | नभ | आकाश, गगन, अंबर, व्योम |
| "बिजली चमक रही है, _____ गरज रहे हैं।" | बादल | मेघ, जलधर, घन, जलद |
| "_____ बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं।" | पानी | जल, नीर, सलिल, तोय |
बादल के दो नामों की बनावट देखिए:
- जल + धर (धारण करने वाला) = जलधर: जल रखने वाला
- जल + द (देने वाला) = जलद: जल देने वाला
बादल पानी रखता भी है और देता भी!
अब मूल कविता याद कीजिए: कवि ने 'वर्षा', 'नभ', 'बादल' और 'पानी' चुने। चारों सरल और छोटे शब्द हैं, जो पंक्ति की लय में आसानी से बैठते हैं।
पाठ पूछता है: "समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि कौन-से शब्द सबसे ज़्यादा साथियों को जँच रहे हैं, और क्यों?" यही असली सीख है: अर्थ कई शब्द देंगे, पर हर शब्द हर पंक्ति में नहीं जँचता। सही शब्द चुनना कवि का सबसे बड़ा काम है!
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