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चिड़िया

क्रिया

कविता की पंक्तियों से क्रिया के बारे में सीखिए।

पृष्ठ 121 पर 'भाषा की बात'। पंक्तियाँ: "पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया गाती है! तुम्हें ज्ञात क्या अपनी बोली में संदेश सुनाती है?" 'गाती' और 'सुनाती' से चिड़िया के काम का पता चलता है।

परिभाषा: "वे शब्द जिनसे कार्य करने या होने का बोध होता है, उन्हें क्रिया कहते हैं।"

दो बातें हैं:

  • करना: 'चिड़िया गाती है'; कोई काम कर रहा है
  • होना: 'बरसात होती है'; कोई करने वाला नहीं, फिर भी कुछ हो रहा है

दोनों क्रिया हैं।

कविता में क्रियाएँ ढूँढ़िए:

भागक्रियाएँ
पहलागाती है, सुनाती है, सिखलाती है, बतलाती है, वास करते, रहते हैं, खाते हैं, जाते हैं, बसाते हैं, सो जाते हैं
दूसराले लेते हैं, बच जाता, छोड़ देते हैं, उड़ते, विचरण करते हैं, भरते हैं
अंतिमकहते हैं, सीखो, डाली है, देखो, तोड़ो, छोड़ो, आती है, चकित कर, उड़ जाती है

अंतिम भाग को देखिए: सीखो, देखो, तोड़ो, छोड़ो। ये भी क्रियाएँ हैं, पर ये आज्ञा दे रही हैं! इसीलिए कविता का अंत इतना ज़ोरदार लगता है: वहाँ पक्षी सिर्फ़ बताते नहीं, कहते हैं।

अब इन क्रियाओं से अपने वाक्य बनाइए: 'मेरी दादी रोज़ सुबह भजन गाती हैं।' 'पक्षी शाम को घोंसले में लौट आते हैं।'

जिन शब्दों से कार्य करने या होने का बोध हो वे क्रिया हैं — गाती, सुनाती, सिखलाती, बतलाती।

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