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स्वदेश

कवि से परिचय

कवि गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' के जीवन और उनकी रचनाओं के बारे में जानिए।

कवि. इस कविता के कवि गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' हैं। उनका जीवनकाल 1883 से 1972 तक रहा, यानी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम भी देखा और आज़ाद भारत भी।

उनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में हुआ।

भाषा. उन्होंने कविता लिखना ब्रजभाषा में शुरू किया, पर बाद में खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में गिने गए। उस समय यह बड़ा बदलाव था, क्योंकि कविता की पुरानी भाषा ब्रजभाषा ही मानी जाती थी।

दो उपनाम. उनके दो उपनाम थे: 'सनेही' और 'त्रिशूल'। (जैसे किसी का स्कूल का नाम अलग और घर का नाम अलग होता है।) कारण उन्होंने खुद बताया: "सरकारी नौकरी के कारण 'सनेही' के अतिरिक्त मुझे दूसरा उपनाम 'त्रिशूल' रखना पड़ा।"

इस एक वाक्य में उस समय का इतिहास छिपा है। अंग्रेज़ी राज में सरकारी नौकरी करते हुए देश-प्रेम की कविता लिखना खतरे का काम था। इसलिए उन्हें दूसरे नाम के पीछे छिपना पड़ा।

दोनों नामों का भाव: 'सनेही' = स्नेह, प्रेम; 'त्रिशूल' = अस्त्र। दोनों नाम उनकी कविता के दो रूप दिखाते हैं।

विषय. उन्होंने केवल देश-प्रेम पर नहीं लिखा। किसान, मज़दूर और सामाजिक बुराइयों पर भी असरदार कविताएँ लिखीं।

प्रमुख रचनाएँ: 'त्रिशूल तरंग', 'राष्ट्रीय मंत्र' और 'कृषक क्रंदन'। 'कृषक क्रंदन' का अर्थ है किसान का रोना। यह बताता है कि उनकी नज़र आम लोगों के दुख पर भी थी।

'सरकारी नौकरी के कारण मुझे दूसरा उपनाम त्रिशूल रखना पड़ा': एक वाक्य में उस समय का इतिहास।

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