स्वदेश
मिलकर करें मिलान
कविता की पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।
मिलान. स्तंभ 1 में कविता की चार पंक्तियाँ हैं, स्तंभ 2 में उनके भाव। हर पंक्ति को उसके सही भाव से जोड़ना है।
1. 'जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।'
→ जिसने किसी काम को करने का साहस छोड़ दिया, वह कोई लक्ष्य नहीं पा सकता।
'पार' शब्द पर ध्यान दीजिए: नदी के पार जाना ही लक्ष्य तक पहुँचना है। कवि ने एक चित्र से बात कही है।
2. 'जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।'
→ जो खुद के साथ दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते, उनका जीवन बेकार है।
ध्यान दीजिए: केवल अपने भीतर जोश काफ़ी नहीं; उसे दूसरों में जगाना भी होता है।
3. 'जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।'
→ जिस देश की ज्ञान-संपदा से पूरा विश्व प्रभावित है।
मिलान की कुंजी है 'ज्ञानी' शब्द। अगर कवि 'धनी' लिखता, तो अर्थ धन-संपदा का होता।
4. 'सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।'
→ जैसे युद्ध में तोप और तलवार चाहिए, वैसे ही मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति चाहिए।
यानी साहस ही हमारी तोप है और इच्छाशक्ति ही हमारी तलवार।
ध्यान रखें: मिलान करते समय पंक्ति के मुख्य शब्द (पार, दूसरों, ज्ञानी, हाथों) पर ध्यान दें।
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