स्वदेश
अनुमान और कल्पना से
अनुमान और कल्पना से कविता के बारे में अपने विचार बनाइए।
अनुमान और कल्पना. ये प्रश्न सोचने को कहते हैं। इनका कोई एक ठीक उत्तर नहीं होता, पर उत्तर के साथ कारण ज़रूर होना चाहिए।
1. कैसे खजाने? 'जिसने कि खजाने खोले हैं' में किस खजाने की बात है? अगली पंक्ति देखिए: 'जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं।' इससे पता चलता है कि ये ज्ञान के खजाने हैं: विद्या, कला, विचार। (देश की प्रकृति और संस्कृति भी इसमें गिनी जा सकती है।)
2. 'उगे बढ़े'. 'उगना' शब्द तो पौधों के लिए आता है। कवि ने जान-बूझकर यह शब्द लिया, ताकि हम खुद को इस देश की मिट्टी का पौधा समझें। पौधा अपनी मिट्टी से अलग होकर नहीं जी सकता; वैसे ही हम अपने देश से जुड़े हैं।
3. 'हृदय' के लिए 'पत्थर' क्यों? पत्थर कठोर है, ठंडा है, उसमें कोई हलचल नहीं। हृदय इसके ठीक उलटा है। इसी उलटेपन से पंक्ति में ज़ोर आता है।
4. पत्थर की कहानी. कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कहानी सुना रहा है। पुस्तक का संकेत: 'जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी…'
इस संकेत में गहरी बात है: पत्थर हमेशा से पत्थर नहीं था। नदी की धारा उसे बदलती थी, वह घिसकर चिकना हुआ। यानी कठोर चीज़ भी बदल सकती है, अगर उस पर कुछ बहता रहे।
5. संरक्षण. देश-प्रेम केवल सीमा की सुरक्षा नहीं; संरक्षण (बचाकर रखना) भी है। किन्हें संरक्षण चाहिए?
- नदियाँ, जंगल, वन्य जीव;
- ऐतिहासिक इमारतें;
- भाषाएँ और लोक-कलाएँ;
- मिट्टी और हवा।
इनकी रक्षा भी देश-प्रेम है।
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