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स्वदेश

भाषा की बात

कविता को भाषा की नज़र से देखिए और नए शब्दों से दोस्ती कीजिए।

भाषा की बात. इसमें चार काम हैं।

1. 'स्वदेश' से जुड़े शब्द: राष्ट्र, मातृभूमि, वतन, जन्मभूमि, देश, स्वराज, तिरंगा, स्वाभिमान। समूह में और शब्द जोड़िए।

2. योजक चिह्न (-). कविता में कई शब्दों के बीच छोटी रेखा लगी है: संसार-संग, रस-धार, दाना-पानी, माता-पिता, राजा-रानी, जाति-उद्धार। इसे योजक चिह्न कहते हैं।

योजक चिह्न का काम: दो शब्दों का आपसी संबंध दिखाना और उन्हें जोड़कर लिखना।

योजक चिह्न हटाकर 'का, की, के, में' लगाइए:

  • संसार-संग → संसार के संग;
  • रस-धार → रस की धार;
  • जाति-उद्धार → जाति का उद्धार।

हर जगह अलग शब्द लगता है। योजक चिह्न से कवि ने पंक्ति छोटी भी रखी और अर्थ भी साफ़ रखा।

3. शब्दों का क्रम. इन पंक्तियों में 'है' पहले आया है: 'है जान एक दिन जाने को', 'है काल-दीप जलता हरदम'।

साधारण क्रम में लिखें: 'जान एक दिन जाने को है', 'काल-दीप हरदम जलता है'। अर्थ वही, पर अब यह गद्य जैसा लगता है।

यानी शब्दों का क्रम बदलकर, 'है' को आरंभ में रखकर, कवि ने कविता में लय लाई।

4. समानार्थी शब्द:

  • भू → धरा, पृथ्वी;
  • दीप → प्रदीप, दीपक;
  • हृदय → दिल, जी;
  • तलवार → असि, कृपाण;
  • दुनिया → जग, संसार;
  • पत्थर → पाहन, पाषाण।
'जान एक दिन जाने को है': 'है' को अंत में रखते ही कविता गद्य बन जाती है।

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