स्वदेश
पाठ से आगे
कविता से आगे बढ़कर उसे अपने जीवन से जोड़िए।
पाठ से आगे. अब कविता को अपने जीवन से जोड़िए।
1. शीर्षक. कविता का शीर्षक 'स्वदेश' है। कई बार कवि किसी पंक्ति को ही शीर्षक बना देते हैं। आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे? यह प्रश्न असल में पूछ रहा है कि आपकी नज़र में कविता का केंद्र कहाँ है।
2. चित्र. कुछ चित्र दिए हैं: पौधों को पानी देना, रेल में कूड़ा फैलाना, गाँव में मिलकर काम करना, सैनिक को फूल देना, सफ़ाई करना, ऐतिहासिक इमारत पर लिखना, बैंक में पंक्ति में खड़े रहना, दफ़्तर में पंखा-बत्ती जलती छोड़ देना, नल से पानी बहाना।
इनमें कौन स्वदेश-प्रेम है, यह तय करना कठिन नहीं, पर पुस्तक कारण भी माँगती है। कारण देते ही समझ आता है कि देश-प्रेम छोटे-छोटे रोज़ के कामों में है: पानी बचाना, पंक्ति में खड़ा होना, इमारत पर न लिखना।
3. हमारे अस्त्र-शस्त्र. सैनिक सीमा पर तोप, तलवार और बंदूक से देश की रक्षा करते हैं। बाकी लोगों के अस्त्र-शस्त्र क्या हैं?
- विद्यार्थी: पुस्तक और परिश्रम;
- अध्यापक: ज्ञान और धैर्य;
- कृषक (किसान): हल और बीज;
- चिकित्सक: दवा और सेवा;
- वैज्ञानिक: प्रयोग और जिज्ञासा;
- श्रमिक: हाथ और कौशल;
- पत्रकार: कलम और सत्य।
यह अभ्यास सीधे कविता की इस पंक्ति से जुड़ा है: 'सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।'
4. झरोखे से. यहाँ सोहनलाल द्विवेदी की कविता 'खादी गीत' का अंश है: "खादी के धागे-धागे में अपनेपन का अभिमान भरा, माता का इसमें मान भरा, अन्यायी का अपमान भरा।"
दोनों कविताएँ स्वतंत्रता आंदोलन के समय की हैं। 'स्वदेश' हृदय की बात करती है, 'खादी गीत' एक वस्तु (खादी) की। पर दोनों में देश-प्रेम एक ही है।
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