तरुण के स्वप्न
मेरी समझ से
भाषण के चार महत्वपूर्ण वाक्यों पर अपनी समझ परखिए।
'मेरी समझ से' के चार प्रश्न भाषण के चार ज़रूरी वाक्यों पर टिके हैं। पुस्तक खुद कहती है: कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी ठीक हो सकते हैं।
1. "उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं": 'हम' कौन? तीन उत्तर ठीक हैं:
- देश का तरुण वर्ग: भाषण युवक-सम्मेलन में है, और वे 'हे मेरे तरुण भाइयो' कहते हैं;
- भारतवासी: सपना पूरे देश का है;
- स्वप्न के उत्तराधिकारी: जो भी इसे आगे ले जाए।
'हम' कौन नहीं?
- सुभाषचंद्र बोस अकेले नहीं: वे 'मैं' नहीं, 'हम' कह रहे हैं;
- चित्तरंजन दास तो बिल्कुल नहीं: सपना उन्हीं का था; उत्तराधिकारी दूसरे होते हैं।
2. स्वाधीन राष्ट्र का सपना किससे साकार होगा? श्रम और कर्म की मर्यादा से। बाकी विकल्प (आर्थिक असमानता, स्त्री-पुरुष के अलग अधिकार, जातिभेद) वे बातें हैं जिन्हें बोस हटाना चाहते थे। उनसे सपना पूरा नहीं होता; उनके मिटने से होता है।
3. उत्तराधिकारी होने का अर्थ? दोनों बातें: उनके सपनों को संजोकर रखना, और उन्हें पूरा करने के लिए खुद कर्म करना।
4. सबको शिक्षा और उन्नति का समान अवसर मिलेगा तो? राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी। जब सबको मौका मिलता है, तो सबकी क्षमता देश के काम आती है।
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