तरुण के स्वप्न
मिलकर करें मिलान और पंक्तियों पर चर्चा
भाषण की पंक्तियों को उनके भाव से मिलाइए और उन पर चर्चा कीजिए।
मिलकर करें मिलान. भाषण की तीन पंक्तियाँ और उनके भाव।
1. सात क्रियाओं वाली पंक्ति: "इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।" ये दिन भर के सारे काम हैं। भाव: हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार उसी लक्ष्य पर केंद्रित हैं।
2. 'स्वदेशी समाज के यंत्र' वाली पंक्ति: "जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा… भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।" भाव: जिस देश की योजनाएँ अपने समाज को ध्यान में रखकर बनेंगी, वहाँ कोई अभाव (कमी) नहीं रहेगा।
ध्यान दीजिए: यहाँ 'स्वदेशी' का अर्थ केवल वस्तुएँ नहीं; अपनी ज़रूरतों से बनी योजनाएँ भी स्वदेशी हैं।
3. 'समाज के दबाव से वह मरे नहीं': भाव: सबको हर तरह की स्वतंत्रता हो, और किसी पर बंधन या सामाजिक दबाव न हो।
पंक्तियों पर चर्चा. कक्षा में इन तीन पंक्तियों पर बात करनी है:
- 'उस समाज में अर्थ की विषमता न हो';
- 'वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना';
- 'उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो'।
सबसे सुंदर चित्र: उत्स और निर्झर. उत्स = जल का स्रोत, जहाँ से पानी निकलता है; निर्झर = बहता हुआ झरना। सपना वह स्रोत भी है जहाँ से ताकत निकलती है, और वह झरना भी जो खुशी बहाता है।
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