LearnWave
Learn it. Master it.

कबीर के दोहे

दोहों का मिलान

दोहों को उनके सही अर्थ और भाव से मिलाइए।

दो मिलान. इस पाठ में दो मिलान हैं, और दोनों अलग काम कराते हैं।

पहला मिलान: अर्थ. हर दोहे की पहली पंक्ति को उसके भाव से जोड़ना है। मुख्य शब्द से मदद मिलती है:

  • 'गुरु' → गुरु-शिष्य संबंध;
  • 'अति' → संतुलन;
  • 'निंदक' → आलोचक;
  • 'मन पंछी' → मन को काबू में रखना, संगति का असर।

सावधानी: 'साधू ऐसा चाहिए' का उत्तर है: 'विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है'। 'साधु' शब्द देखकर भक्ति वाला उत्तर मत चुन लीजिए।

दूसरा मिलान: टूटे दोहे जोड़ना. हर दोहे की पहली पंक्ति को उसकी अपनी दूसरी पंक्ति से जोड़ना है।

साधन 1: अर्थ. 'निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय' के बाद वही पंक्ति आएगी जो बताए कि निंदक को पास क्यों रखें: 'बिन पानी साबुन बिना, निरमल करै सुभाय'। इसी तरह 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय' के बाद: 'बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय'।

साधन 2: तुक. दोहे की दोनों पंक्तियों के अंत में तुक मिलता है:

  • पाँय / बताय;
  • चूप / धूप;
  • खोय / होय;
  • छवाय / सुभाय;
  • सुभाय / उड़ाय;
  • जाय / पाय;
  • खजूर / दूर;
  • पाप / आप।

अगर अर्थ से शक हो, तो तुक मिलाकर देख लीजिए; दोहे में दोनों पंक्तियों का तुक ज़रूर मिलता है।

अर्थ से शक हो तो तुक मिलाकर देखिए: दोहे में दोनों पंक्तियों का तुक ज़रूर मिलता है।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.