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एक टोकरी भर मिट्टी

'कि' और 'की' का उपयोग

जानिए कि 'कि' और 'की' में क्या अंतर है और इनका सही उपयोग कैसे करें।

'कि' और 'की'. दोनों सुनने में लगभग एक जैसे हैं, पर काम बिलकुल अलग है।

'कि' = संयोजक. "इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी।" यहाँ 'कि' एक संयोजक है, यानी जोड़ने वाला शब्द। यह दो बातें जोड़ रहा है: 'भरोसा है' और 'वह रोटी खाने लगेगी'।

'कि' बताता है कि क्या कहा गया, सोचा गया, देखा गया। अक्सर इन शब्दों के बाद 'कि' आता है: कहा कि, सोचा कि, देखा कि, भरोसा है कि, विश्वास था कि। और 'कि' के बाद एक पूरा वाक्य आता है।

'की' = संबंध. "अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी।" यहाँ 'की' संबंधसूचक शब्द है। इसका काम है दो नामों का संबंध बताना। झोंपड़ी किसकी? वृद्धा की।

इसी परिवार के दो और शब्द हैं: 'का' और 'के'। ये भी संबंध बताते हैं।

पहचान का नियम:

  • आगे पूरा वाक्य आए → 'कि';
  • दो नामों के बीच संबंध हो → 'का', 'की', 'के'।

अभ्यास:

  • 'वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।' (आगे पूरा वाक्य)
  • 'वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी।' (चिंता किसकी? पोती की)
  • 'झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।' (मिट्टी किसकी? झोंपड़ी की)

एक ही वाक्य में 'कि' और 'का' दोनों आ सकते हैं: 'उसने सोचा कि झोंपड़ी का एक कोना ही काफ़ी है।'

आगे पूरा वाक्य आए तो 'कि'; दो नामों का संबंध हो तो 'का', 'की' या 'के'।

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