LearnWave
Learn it. Master it.

मत बाँधो

कविता का पहला भाग

महादेवी वर्मा की कविता 'मत बाँधो' का पहला भाग पढ़िए और सपनों के पंखों के बारे में सोचिए।

एक निवेदन. कविता एक विनती से शुरू होती है: "इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!"

ये दो पंक्तियाँ कविता की टेक हैं: शुरू में आती हैं और अंत में फिर लौट आती हैं।

अब कवयित्री तीन उदाहरण देती हैं, और तीनों में एक बात है: हर चीज़ की एक ही गति (दिशा) होती है, ऊपर की या नीचे की।

1. सुगंध: "सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है?" 'सौरभ' = सुगंध। सुगंध ऊपर उठ जाती है और लौटती नहीं। उसकी गति केवल ऊपर की है।

2. बीज: "बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?" बीज नीचे गिरता है और वहीं रह जाता है; वह उड़ नहीं पाता। उसकी गति केवल नीचे की है।

3. आग और धुआँ: "अग्नि सदा धरती पर जलती / धूम गगन में मँडराता है!" आग नीचे रहती है, धुआँ ऊपर जाता है। दोनों की दिशा अलग-अलग है।

निष्कर्ष: "सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़ कर आँखों में आता है!" सपना अकेली ऐसी चीज़ है जिसमें दोनों गतियाँ हैं: वह ऊपर भी उठता है, और लौटकर आँखों में भी आता है।

इसीलिए दोनों की रक्षा माँगी गई है: "इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!"

  • आरोहण = नीचे से ऊपर जाना, चढ़ना;
  • अवरोहण = ऊपर से नीचे आना, उतरना।
सुगंध केवल ऊपर जाती है, बीज केवल नीचे: सपना अकेला है जिसमें दोनों गतियाँ हैं।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.