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नए मेहमान

मेरी समझ से

एकांकी के बारे में अपनी समझ परखिए।

'मेरी समझ से' में पाँच प्रश्न हैं। आख़िरी प्रश्न पूरे पाठ की कुंजी है।

1. 'सीधे लड़के' क्यों कहा? दो उत्तर ठीक हैं: बच्चे कोई प्रश्न नहीं कर रहे थे, और उनमें आज्ञाकारिता (कहना मानना) थी।

2. विश्वनाथ ने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा? दो उत्तर ठीक हैं:

  • रेवती कहती हैं: 'वे तो हमको मुसीबत में देखकर प्रसन्न होते हैं।'
  • पड़ोसी किसी तरह का सहयोग नहीं करते: खाली छत पर भी खाट नहीं बिछाने देते।

3. रेवती की कामना ('कोई मेहमान न आए') के कारण:

  • ठहराने की ठीक व्यवस्था न होना;
  • स्वास्थ्य ठीक न होना;
  • मेहमान आएँ तो घर का काम बढ़ जाना।

4. 'हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए!' किस मुसीबत की बात है? मेहमानों के आने की। और यह वाक्य ठीक उसी पल आता है जब दरवाज़ा खटखटाता है: जिस बात से वे डर रही थीं, वही हो रही है।

5. किसी रचना को नाटक का रूप कौन-सी बात देती है? विकल्प: संवाद, कथा, वर्णन, मंचन।

उत्तर है संवाद। क्यों?

  • कथा तो कहानी में भी होती है;
  • वर्णन भी कहानी में होता है;
  • मंचन लिखने के बाद की बात है।

नाटक में सब कुछ पात्रों के आपसी संवाद से आगे बढ़ता है।

ध्यान दीजिए: नाटक का मंचन न भी हो, तब भी वह नाटक ही रहता है। उसे नाटक संवाद बनाते हैं, मंच नहीं।

कथा और वर्णन कहानी में भी होते हैं: नाटक को नाटक संवाद ही बनाते हैं।

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