प्रहलाद अग्रवाल — तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
शैलेंद्र: गीतकार नहीं, कवि
शैलेंद्र के गीतों की विशेषताएँ और कलाकार का कर्तव्य बताना।
'दसों दिशाओं'. फ़िल्म 'श्री 420' के एक गीत में 'दसों दिशाओं' शब्द पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की: दर्शक तो चार दिशाएँ ही जानते हैं। शैलेंद्र नहीं माने।
कलाकार का काम. उनका मत था: दर्शकों की पसंद के बहाने उथलापन (हल्कापन) मत थोपो। कलाकार का काम है दर्शकों की रुचि को सुधारना (परिष्कार करना), उसे नीचे गिराना नहीं।
उनके गीत. शैलेंद्र के गीत भावपूर्ण थे, पर सरल: शांत नदी जैसे बहते, समुद्र जैसे गहरे। उनमें करुणा के साथ परिस्थितियों से जूझने का संदेश भी था, निराशा नहीं।
फ़िल्मों की कमी. लेखक कहता है: हमारी फ़िल्मों में लोक-तत्त्व (गाँव-लोक का सच्चा जीवन) कम होता है, और दुख को बढ़ा-चढ़ाकर लाउड दिखाकर दर्शकों की भावनाओं का शोषण किया जाता है, ताकि टिकट बिकें।
गीतकार नहीं, कवि. 'तीसरी कसम' ने दुख को सहज, जीवन जैसा दिखाया। इसीलिए लेखक शैलेंद्र को सिर्फ़ गीतकार नहीं, कवि कहता है।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.