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प्रहलाद अग्रवाल — तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

'से' के प्रयोग, संधि और समास

'से' के प्रयोग पहचानना और संधि-समास करना।

'से' के कई काम. 'से' कई अर्थ देता है:

  • स्रोत: दसों दिशाओं से;
  • रीति: हैसियत से;
  • संबंध: तौर-तरीक़ों से अनजान;
  • परिवर्तन: दो से चार;
  • तुलना: समझ से परे।

'यह नहीं, वह'. 'फ़िल्म नहीं, कविता' जैसी बनावट किसी बात पर ज़ोर देती है।

उर्दू-हिंदी जोड़े. शिद्दत = तीव्रता, यक़ीन = विश्वास, नावाक़िफ़ = अनजान, खालिस = शुद्ध।

संधि-विच्छेद.

  • सर्वोत्कृष्ट = सर्व + उत्कृष्ट (अ + उ = ओ, गुण संधि);
  • घनानंद = घन + आनंद (अ + आ = आ, दीर्घ संधि);
  • चरमोत्कर्ष = चरम + उत्कर्ष (गुण संधि; पाठ में 'चर्मोत्कर्ष' छपा है)।

तत्पुरुष समास. दूसरा शब्द मुख्य: राष्ट्रपति = राष्ट्र का पति; लोकप्रिय = लोक में प्रिय।

'से' के कई चेहरे; संधि में अ + उ = ओ, अ + आ = आ।

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