LearnWave
Learn it. Master it.

रवींद्र केलेकर — पतझर में टूटी पत्तियाँ

झेन की देन

टी-सेरेमनी का वर्णन और वर्तमान में जीने का अर्थ बताना।

जापान की बीमारी. लेखक जापान गए। उनके मित्र ने बताया: यहाँ बहुत से लोग मन से बीमार (मानसिक रोगी) हैं। कारण: जीवन की रफ़्तार। यहाँ कोई चलता नहीं, दौड़ता है; कोई बोलता नहीं, बकता है।

स्पीड का इंजन. अमेरिका से होड़ में जापानी महीने का काम एक दिन में पूरा करने की कोशिश करते हैं। उनका दिमाग मानो 'स्पीड का इंजन' लगाकर हज़ार गुना तेज़ दौड़ता है। फिर एक दिन तनाव से इंजन टूट जाता है।

टी-सेरेमनी (चा-नो-यू). मित्र उन्हें चाय पीने की एक विधि दिखाने ले गए, जिसे जापानी में 'चा-नो-यू' कहते हैं:

  • छह मंज़िली इमारत की छत पर दफ़्ती (मोटे गत्ते) की दीवारों और चटाई वाली एक सुंदर पर्णकुटी;
  • बाहर मिट्टी का बर्तन, उसके पानी से हाथ-पाँव धोकर अंदर जाते;
  • एक साथ तीन से ज़्यादा लोग नहीं;
  • चाय बनाने वाला (चाजीन) हर काम धीरे और गरिमा से करता: अँगीठी सुलगाना, बर्तन पोंछना, चाय डालना।

दो घूँट, डेढ़ घंटा. प्यालों में बस दो घूँट चाय थी। उसे डेढ़ घंटे तक एक-एक बूँद करके पिया गया। धीरे-धीरे लेखक के दिमाग की रफ़्तार धीमी पड़ी, फिर थम गई; उसे सन्नाटा भी साफ़ सुनाई देने लगा।

झेन की देन. झेन बौद्ध धर्म की ध्यान की एक विधि है (यह जैन धर्म नहीं है)। लेखक ने सीखा: भूतकाल बीत गया, भविष्य अभी आया नहीं; दोनों मिथ्या (झूठे) हैं। सिर्फ़ वर्तमान का यह पल सच है, और उसी में जीना चाहिए। उस दिन उन्होंने जाना कि 'जीना किसे कहते हैं'।

चा-नो-यू की धीमी, शांत चाय सिखाती है: भूत-भविष्य मिथ्या हैं, अभी का पल ही सच है।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.