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मीरा — पद

मीरा की भाषा

मीरा की भाषा-शैली और काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करना।

भाषा. मीरा के पदों में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मेल है; कहीं-कहीं पंजाबी और खड़ी बोली के रूप भी।

बोली के शब्द, आज के रूप.

  • री = की, म्हारी = मेरी, म्हाने = मुझे;
  • घणो = बहुत, हिवड़ो = हृदय;
  • '-स्यूँ' = '-ऊँगी': रहस्यूँ = रहूँगी, पास्यूँ = पाऊँगी, गास्यूँ = गाऊँगी।

अलंकार.

  • अनुप्रास (एक अक्षर बार-बार): 'भाव भगती', 'काटी कुण्जर';
  • रूपक (एक चीज़ को दूसरी मान लेना): 'सुमरण खरची', 'भाव भगती जागीरी';
  • पुनरुक्ति (शब्द दोहराना): 'ऊँचा-ऊँचा'।

गाने लायक. मीरा के पद गेय हैं, यानी गाने के लिए बने। उनकी भक्ति में दैन्य (विनती) और माधुर्य (मीठा प्रेम) दोनों हैं।

काव्य-सौंदर्य कैसे लिखें. पहले भाव लिखिए (कवि क्या कहना चाहता है), फिर शिल्प: भाषा, अलंकार, छंद, रस।

राजस्थानी-ब्रज-गुजराती की मिठास, अनुप्रास और रूपक: मीरा के गेय पद।

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