कैफ़ी आज़मी — कर चले हम फ़िदा
गीत की भाषा और हमारे कर्तव्य
गीत के मुहावरों का प्रयोग करना और संबोधन का नियम लागू करना।
गीत के मुहावरे.
- कट गए सर: प्राण दे दिए;
- नब्ज़ जमती गई: जीवन खत्म होने लगा;
- जान देने की रुत: बलिदान का अवसर;
- सर पर कफ़न बाँधना: मरने को तैयार रहना;
- हाथ उठने लगे: हमला होने लगा।
'साथियो' या 'साथियों'? संबोधन (किसी को पुकारना) में बहुवचन पर अनुस्वार (बिंदी) नहीं लगता: साथियो, भाइयो, बहनो, मित्रो। संबोधन न हो, तो लगता है: 'साथियों ने मदद की।' गीत में पुकार है, इसलिए 'साथियो'।
भाषा. गीत सरल उर्दू-हिंदी में है। टेक का बार-बार आना इसे यादगार बनाता है; इसीलिए यह राष्ट्रीय पर्वों पर स्कूलों में गाया जाता है।
हमारे कर्तव्य. आज़ादी पाना कठिन था; उसे बचाए रखना उससे भी कठिन है। यह एकता, ईमानदारी और अपना कर्तव्य निभाने से ही संभव है। सीमा पर सैनिक; हम अपने-अपने काम में।
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