रवींद्रनाथ ठाकुर — आत्मत्राण
आत्मत्राण का अर्थ
शीर्षक की सार्थकता और प्रार्थनाओं की तुलना करना।
'आत्मत्राण' का अर्थ. आत्म = खुद, त्राण = रक्षा, बचाव, डर से छुटकारा। यानी खुद अपनी रक्षा करना, अपने भीतर के डर से बाहर आना।
शीर्षक क्यों सही? कविता में कवि बार-बार कहता है 'यह मेरी प्रार्थना नहीं', और आसान रास्ता (मुसीबत से बचाव, सांत्वना, रोज़ की रक्षा) ठुकराकर शक्ति माँगता है, ताकि अपनी रक्षा खुद कर सके। इसलिए 'आत्मत्राण' शीर्षक सटीक है।
दूसरी प्रार्थनाओं से तुलना. 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' भी शक्ति और विश्वास माँगती है, पर वह सामूहिक ('हमें') है; 'आत्मत्राण' व्यक्तिगत ('मुझे') है। और मीरा ईश्वर से पीड़ा हरने की विनती करती हैं, जबकि यह कवि पीड़ा सहने की ताकत माँगता है।
प्रार्थना और मेहनत. प्रार्थना से मन को बल मिलता है; पर इच्छाएँ पूरी होती हैं मेहनत, योजना और धैर्य से। परीक्षा से पहले भी: डर नहीं, तैयारी।
अनुवाद का कमाल. द्विवेदी जी का अनुवाद दिखाता है कि अच्छे अनुवाद में मूल रचना की आत्मा बची रहती है।
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