सृजनात्मकता और लेखन / Creativity and Writing
सृजनात्मकता क्या है?
सृजनात्मकता की मूल अवधारणा समझाना।
इकाई की शुरुआत हेलेन केलर (1880-1968) से होती है: जो न देख सकती थीं, न सुन सकती थीं, फिर भी स्पर्श से पेड़ों की छाल, कलियों और पंखुड़ियों में सैकड़ों रोचक चीज़ें 'देख' लेती थीं — छोटी चीज़ों की अहमियत पहचानना भी रचनात्मक अनुभव है।
प्रकृति सबसे बड़ी सर्जक है: पत्ते झड़कर नए आते हैं, आम की मंजरी से फल और फिर गुठली से नया पौधा — यह चक्र चलता रहता है।
मनुष्य ने प्रकृति से सृजन सीखा: भीमबेटका की गुफाओं के चित्र, खेती, गीत और नृत्य (सबसे आदिम कला, जिसमें शरीर ही माध्यम है)।
रोज़ की चीज़ों में भी सृजन है: गेहूँ की बुवाई से फूली हुई रोटी तक की 'गाथा'; मिट्टी के लोंदे से सुराही; पत्थर से एलोरा की मूर्तियाँ।
कई रचनाकार एक से अधिक कलारूपों में रचते हैं — रवींद्रनाथ ठाकुर, महादेवी वर्मा (कवयित्री और चित्रकार), शमशेर।
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