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साहित्यिक लेखन / Literary Writing

साहित्यिक लेखन: परिचय और कविता

साहित्यिक लेखन का परिचय देना और कविता की परंपरा समझाना।

इकाई प्रेमचंद के कथन से खुलती है: लेखक अपने काल के विधाता होते हैं — वे तटस्थ होकर अन्याय होते नहीं देख सकते; रचनात्मकता के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी ज़रूरी है।

लेखन के कई रूप हैं — कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास, आत्मकथा, रिपोर्ताज, संस्मरण, निबंध; यहाँ मुख्य चर्चा कविता, कहानी और नाटक की है।

चाहे भारत हो या यूरोप, साहित्य का सबसे पहला रूप कविता ही रहा — इसलिए उसे 'मानवता की मातृभाषा' कहा जाता है: रामायण-महाभारत और होमर के 'इलियड'-'ओडेसी'।

महाकाव्यों की मौखिक परंपरा आज भी जीवित है: बाउल (बंगाल), पंडवानी (छत्तीसगढ़), आल्हा-ऊदल (बुंदेलखंड), पाबूजी की पड़ (राजस्थान)।

कविता ने रूप बदले — महाकाव्य, खंडकाव्य, छंदमय, छंदमुक्त, नयी कविता; उदाहरण: छंदोबद्ध 'हम पंछी उन्मुक्त गगन के' (शिवमंगल सिंह 'सुमन') और छंदमुक्त 'हम नदी के द्वीप हैं' (अज्ञेय)।

कविता — मानवता की मातृभाषा।

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