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साहित्यिक लेखन / Literary Writing

आत्मकथात्मक लेखन

अपने जीवन से लिखना सिखाना।

प्रेमचंद: कहानियाँ चारों तरफ़ हवा में बिखरी हैं, सवाल उन्हें पकड़ने का है; हर व्यक्ति का जीवन कथा बनने योग्य है — मुक्तिबोध: 'प्रत्येक वाणी में महाकाव्य-पीड़ा है'।

आत्मकथा की पहली शर्त है साफ़-साफ़, सच-सच कहना; गांधी जी के अनुसार डायरी सत्य के उपासक के लिए पहरेदार है — सच न हो तो वह खोटा सिक्का है, सच हो तो सोने की मुहर से कीमती।

साधारण लोगों की आत्मकथाएँ भी महत्त्वपूर्ण हैं — इंग्लैंड के मज़दूरों की, भारत में दलित-वंचितों की; उदाहरण: बेबी हालदार की 'आलो-आँधारि', जिसमें इतिहास पढ़ते हुए उसे माँ याद आती है।

डायरी और पत्र: ऐन फ़्रैंक की डायरी (नाज़ियों से छिपकर रहते हुए लिखी), केदारनाथ अग्रवाल का राम विलास शर्मा को पत्र; रसूल हमज़ातोव का 'मेरा दागिस्तान' मातृभूमि से आत्मीय रिश्ता; हरभजन सिंह की साहित्यिक आत्मकथा।

भेद: डायरी में तिथि और वर्तमान ज़रूरी; यात्रा-वृत्तांत में स्थान, संस्कृति और लोग (कृष्णनाथ का 'स्पीति में बारिश'); पत्र में दो व्यक्ति और संबोधन की आत्मीयता — और आत्मकथा लिखने का अभ्यास रचनाकार बनने की पहली तैयारी है।

सच्चाई और सरलता — आत्मकथा की पहली शर्त।

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