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अनुवाद / Translation

अनुवाद के विविध रूप

क्षेत्र के अनुसार अनुवाद करना सिखाना।

साहित्य के अनुवाद में भाषा के साथ उसके साहित्य की समझ चाहिए — टैगोर और जीवनानंद दास दोनों बांग्ला के कवि हैं, पर उनका शब्द-चयन, विषय और संगीत अलग है। 'गीतांजलि' के तीन हिंदी अनुवाद (प्रयाग शुक्ल, रमा तिवारी, युगजीत नवलपुरी) दिखाते हैं कि एक ही कविता कितने रूप ले सकती है।

अरुंधति रॉय के उपन्यास-अंश का नीलाभ का अनुवाद और 'एलिस' के दो अनुवाद (कृष्ण बलदेव वैद — मूल के निकट; शमशेर बहादुर सिंह — खुले और रचनात्मक) बताते हैं कि अनुवादक की दृष्टि अनुवाद को आकार देती है।

तकनीकी अनुवाद में मान्य शब्दावली चाहिए: किसी संस्था का 'प्रेसिडेंट' अध्यक्ष है, पर भारत का 'प्रेसिडेंट' राष्ट्रपति। अकादमिक अनुवाद (जैसे मोहनजोदड़ो की चक्कियों पर मैके की 1937 की रिपोर्ट, कृष्ण कुमार का शिक्षा पर लेख) में विषय की जानकारी और तथ्यों की रक्षा ही अनुवादक की सृजनात्मकता है।

मीडिया के अनुवाद में ताज़ा घटनाओं की जानकारी चाहिए और कुछ भी न छूटे, न जुड़े। सबसे आम गड़बड़ी अंग्रेज़ी की वाक्य-रचना की नकल है; अच्छा अनूदित समाचार ऐसा लगे जैसे उसी भाषा में लिखा गया हो — केनेची होरी वाला लंबा वाक्य छोटे-छोटे वाक्यों में तोड़ना बेहतर है।

शब्दशः अनुवाद से अर्थ का अनर्थ: 'police patrolling' को 'पेट्रोल छिड़कना', 'steel plant' को 'इस्पात का पौधा', 'road map to peace' को 'सड़क का नक्शा'। 'Ten killed in a road accident' का सबसे निकट अनुवाद 'सड़क दुर्घटना में दस मारे गए' है। अच्छे अनुवाद की कसौटी: पाठक को लगे ही नहीं कि वह अनुवाद है।

अच्छा अनुवाद वह है जो अनुवाद न लगे।

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