मीडिया लेखन / Media Writing
रेडियो और टेलीविज़न के लिए लिखना
दोनों माध्यमों के लेखन-नियम सिखाना।
रेडियो श्रव्य माध्यम है: हर जगह और हर वर्ग तक पहुँचता है, काम करते हुए भी सुना जाता है ('ऑडियो वॉलपेपर'); पर एकरेखीय है — छूटा हुआ दोबारा नहीं सुना जा सकता, इसलिए कठिन और तकनीकी शब्द, लंबे वाक्य नहीं; बोलचाल की शैली।
हर सेकेंड में करीब दो-ढाई शब्द बोले जा सकते हैं, इसलिए एक मिनट की कॉपी में 120 से 130 शब्द। कॉपी वर्तमान काल में; तिथि की जगह 'आज सुबह', 'कल'; स्थान-समय कॉपी में ही। बड़ी रकम लगभग में, पर स्कोर (98 रन) और प्रतिशत ज्यों-के-त्यों।
टेलीविज़न में दृश्य सबसे अहम: दृश्य ईंटें हैं, शब्द सीमेंट; शब्दों की किफ़ायत — जहाँ दृश्य बोलें, वहाँ वॉयस ओवर नहीं। प्राकृतिक ध्वनि (नैट साउंड) — मैच का शोर, पानी की कलकल — रिपोर्ट को जीवंत बनाती है; उसके लिए छोड़ा अंतराल 'ब्रीद' कहलाता है।
साउंड बाइट: साक्षात्कार के छोटे टुकड़े; डेढ़ मिनट तक की रिपोर्ट में हर बाइट 10 सेकेंड से छोटा नहीं और औसतन 20 सेकेंड से बड़ा नहीं, और आमतौर पर दो ही; बाइट नई बात जोड़े, दोहराए नहीं।
रिपोर्ट (पैकेज) का ढाँचा: एंकर लिंक (15 से 17 सेकेंड) → वॉयस ओवर → बाइट → वॉयस ओवर → बाइट → 'पीस टू कैमरा'। टीवी समाचार भी उल्टा पिरामिड शैली में — सबसे अहम बात पहले।
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