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चिड़िया का गीत

पक्षियों के नाम खोजो

अक्षर-जाल में छिपे पक्षियों के नाम खोजो।

तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 13 पर एक अक्षर-जाल है। उसमें अक्षर खानों में लिखे हैं, और उनके बीच दस पक्षियों के नाम छिपे हैं। जाल में छह पंक्तियाँ (बाएँ से दाएँ जाने वाली लाइनें) और पाँच स्तंभ (ऊपर से नीचे जाने वाली लाइनें) हैं। यहाँ हर पंक्ति के अक्षर क्रम से लिखे हैं:

पहली पंक्ति: नी, ल, कं, ठ, ती। दूसरी पंक्ति: मै, ब, त, ख, त। तीसरी पंक्ति: ना, क, बू, त, र। चौथी पंक्ति: ची, ल, गौ, रै, या। पाँचवीं पंक्ति: बु, ल, बु, ल, बा। छठी पंक्ति: सा, र, स, बा, ज।

किताब ने पहला नाम खोजकर दिखाया है: पहली पंक्ति के पहले चार अक्षर नी-ल-कं-ठ मिलकर बनाते हैं 'नीलकंठ'। पंक्तियों में बाएँ से दाएँ पढ़ने पर और भी नाम मिलते हैं: दूसरी पंक्ति में 'बतख', तीसरी में 'कबूतर', चौथी में 'चील' और 'गौरैया', पाँचवीं में 'बुलबुल', और छठी में 'सारस' और 'बाज'।

कुछ नाम ऊपर से नीचे भी छिपे हैं। पहले स्तंभ में दूसरे और तीसरे खाने के अक्षर मै-ना मिलकर 'मैना' बनाते हैं। आखिरी स्तंभ में सबसे ऊपर के तीन अक्षर ती-त-र मिलकर 'तीतर' बनाते हैं। इस तरह कुल दस पक्षी मिलते हैं: नीलकंठ, मैना, बतख, तीतर, कबूतर, चील, गौरैया, बुलबुल, सारस और बाज।

अक्षर-जाल में अक्षरों को बाएँ से दाएँ और ऊपर से नीचे मिलाकर पढ़ने पर दस पक्षियों के नाम मिलते हैं: नीलकंठ, मैना, बतख, तीतर, कबूतर, चील, गौरैया, बुलबुल, सारस, बाज।

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