कविता का कमाल
ध्वनि और हरकत के शब्द
ध्वनि और हरकत बताने वाले शब्द सीखो।
आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 11 'कविता का कमाल' में मदन की कविता की सबसे मज़ेदार बात उसके आवाज़ और हरकत वाले शब्द हैं। ये शब्द सुनते ही आँखों के सामने तसवीर बन जाती है।
खुदुर-खुदुर — कुत्ता पंजों से ज़मीन खोद रहा था; मिट्टी खुरचने की आवाज़ ऐसी ही लगती है। सुरुर-सुरुर — भैंस तालाब से पानी पी रही थी; पानी खींचकर पीने की आवाज़ ऐसी ही होती है। किताब के पृष्ठ 134 पर पूछा गया है कि पीने के साथ 'सुरुर-सुरुर' क्यों आया — क्योंकि यह पीने की आवाज़ जैसा सुनाई देता है।
ताक-झाँक — चिड़िया पत्तियों के बीच से सिर निकालकर इधर-उधर झाँक रही थी; चुपके से बार-बार देखने को ताक-झाँक कहते हैं। सरक-सरक — साँप रेंगता हुआ जा रहा था; साँप के पैर नहीं होते, वह ज़मीन पर सरकता है, इसलिए उसके लिए 'सरक-सरक' आया। कहानी में साँप के आने से पहले मदन को 'सर्र' की आवाज़ भी सुनाई दी थी।
किताब के पृष्ठ 137 पर 'आपकी कविता' में रजनी स्कूल जाते हुए पेड़ पर डाल-डाल कूदते बंदर देखती है — बंदर की बोली 'खों-खों' है। फिर वह एक सियार देखती है, जो 'हुआँ-हुआँ' कर रहा था — यह सियार की बोली है।
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