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कविता का कमाल

कविता की पंक्तियाँ

मदन की कविता की पंक्तियाँ पढ़ो और समझो।

अपनी किताब 'वीणा' का पृष्ठ 129 खोलो। वहाँ पाठ 11 'कविता का कमाल' में मदन की पूरी कविता एक साथ छपी है — आठ पंक्तियाँ। मदन ने ये पंक्तियाँ उसी क्रम में बनाई थीं जिस क्रम में रास्ते में चीज़ें देखीं। इसलिए कहानी याद हो, तो क्रम भी याद हो जाता है।

कविता की पंक्तियाँ इस क्रम में हैं: पहली — कुत्ते से पूछती है कि 'खुदुर-खुदुर' क्या खोद रहे हो। दूसरी — भैंस से पूछती है कि 'सुरुर-सुरुर' क्या पी रही हो। तीसरी — चिड़िया से पूछती है कि 'ताक-झाँक' करके क्या खोज रही हो। चौथी — कहती है कि हम जानते हैं तुम क्या ढूँढ़ रहे हो।

पाँचवीं — साँप से पूछती है कि 'सरक-सरक' कहाँ भाग रहे हो। छठी — कहती है कि तुम जानते हो, हम देख रहे हैं। सातवीं — कहती है कि तुम हमसे बच नहीं सकते। आठवीं, आखिरी — बस नाम पुकारती है: धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह!

कविता गाँव की बोली में है। उसमें 'खोदता है' की जगह 'खोदत है', और 'पीता है' की जगह 'पीबत है' आता है। इसलिए किताब के पृष्ठ 132 पर भैंस वाली पंक्ति का सही शब्द 'पीबत' है — 'पीयत' या 'चलत' नहीं। और जब मदन ने पूछा 'आप कौन हैं, साहब?', तो जवाब था 'धन्नू शाह' — 'धन्नू' में आधा न् और आखिर में बड़ा ऊ (ू)।

मदन की कविता की पंक्तियाँ उसी क्रम में हैं जिसमें उसने चीज़ें देखीं: कुत्ता (खुदुर-खुदुर) → भैंस (सुरुर-सुरुर) → चिड़िया (ताक-झाँक) → 'हम जानते हैं' → साँप (सरक-सरक) → 'हम देख रहे हैं' → 'बच नहीं सकते' → धन्नू शाह।

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