कविता का कमाल
बंदर की पहेली
बंदर से जुड़ी पहेली बूझो।
आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 11 के आखिर में, पृष्ठ 138 पर, 'आपकी सूझ-बूझ' नाम की एक पहेली है। एक आदमी के घर के बाहर दस मीटर ऊँचा खजूर का पेड़ था। एक बंदर उसकी चोटी तक पहुँचना चाहता था। मुश्किल यह थी कि वह दिन में 5 मीटर चढ़ जाता, पर रात में 4 मीटर नीचे फिसल जाता। बताओ, बंदर कौन-से दिन चोटी पर पहुँचेगा?
जल्दी में कई लोग सोचते हैं: एक दिन-रात में बंदर 5 − 4 = 1 मीटर ऊपर जाता है, तो 10 मीटर में 10 दिन लगेंगे। पर रुको! जिस दिन बंदर चोटी पर पहुँच जाएगा, उसके बाद फिसलने की बात ही नहीं रहेगी। इसलिए दिन-दिन गिनकर देखो।
पहला दिन: 0 से चढ़कर 5 मीटर; रात में फिसलकर 1 मीटर। दूसरा दिन: 1 से 6 मीटर; रात में 2 मीटर। तीसरा दिन: 2 से 7 मीटर; रात में 3 मीटर। चौथा दिन: 3 से 8 मीटर; रात में 4 मीटर। पाँचवाँ दिन: 4 से 9 मीटर; रात में 5 मीटर।
छठा दिन: 5 मीटर से 5 मीटर चढ़ा — 5 + 5 = 10 मीटर। यही तो पेड़ की चोटी है! बंदर छठे दिन चोटी पर पहुँच जाता है। किताब में उलटा छपा उत्तर भी यही कहता है: छठवें (छठे) दिन।
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