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शतरंज में मात

तेनालीराम

जानो कि नाटक क्या होता है और चतुर तेनालीराम से मिलो।

आपकी किताब 'वीणा' का पाठ 12 'शतरंज में मात' एक नाटक है। नाटक शुरू होने से पहले किताब एक छोटे-से डिब्बे में बताती है कि इस नाटक के मुख्य पात्र तेनालीरामन कौन थे।

उनका पूरा नाम तेनाली रामकृष्ण था, पर लोग उन्हें तेनालीरामन या तेनाली भी कहते हैं। बहुत समय पहले विजयनगर नाम का एक राज्य था, जिसके राजा थे कृष्णदेव राय। तेनालीरामन राजा कृष्णदेव राय के दरबार में रहते थे।

दरबार में तेनालीरामन दो रूपों में जाने जाते थे — विदूषक और राज परामर्शदाता। विदूषक यानी वह व्यक्ति जो अपनी मज़ेदार बातों से राजा और दरबार को हँसाता है। राज परामर्शदाता यानी वह व्यक्ति जो राजा को सलाह (परामर्श) देता है।

तेनालीरामन अपनी कुशाग्र बुद्धि के लिए प्रसिद्ध हैं। कुशाग्र बुद्धि यानी बहुत तेज़ दिमाग, जो मुश्किल से मुश्किल बात का हल झट से ढूँढ़ ले। उनके हँसी से भरे किस्से (किताब इन्हें 'हास्य भरे वृत्तांत' कहती है) आज भी बच्चे और बड़े मज़े से सुनते-सुनाते हैं। इस नाटक में भी आप देखोगे कि वे अपनी बुद्धि से एक बड़ी मुश्किल से कैसे बचते हैं।

तेनाली रामकृष्ण (तेनालीरामन) विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में विदूषक और राज परामर्शदाता थे, और अपनी कुशाग्र (तेज़) बुद्धि तथा हँसी भरे किस्सों के लिए प्रसिद्ध हैं।

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