हमारा आदित्य
सूर्य के बारे में
पाठ 'हमारा आदित्य' पढ़ो और सूर्य के बारे में जानो।
आपकी किताब 'वीणा' का पाठ 13 'हमारा आदित्य' एक संवाद है — कक्षा में अध्यापक और विद्यार्थियों की बातचीत। पिछली कक्षा में उन्होंने चाँद और चंद्रयान के बारे में जाना था; आज की बात सूर्य के बारे में है। इसे यहाँ छोटे में पढ़ो।
अध्यापक पूछते हैं कि सूर्य क्या है। वाणी कहती है कि उसने सुना है, सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आकाश में घूमने वाला एक राजा है; गौरव ने भी ऐसा ही सुना है। राहुल कहता है कि सूर्य आग का एक गोला है। सुमन कहती है कि सूर्य एक ग्रह है। रवि कहता है — नहीं, यह तो एक तारा है। अध्यापक कहते हैं: उत्तम! सूर्य एक तारा है। यह बहुत अधिक गरम है, इसलिए लोग इसे आग का गोला भी कहते हैं।
ज्योति हैरान होती है कि सूर्य पृथ्वी से बहुत दूर है, फिर भी कितनी गरमी देता है। भास्कर को गरमी के मौसम का सूरज अच्छा नहीं लगता, पर सुमन बताती है कि सर्दियों में तो धूप से उठने का मन ही नहीं करता — उसकी नानी तो पूरे दिन धूप में बैठी रहती हैं!
फिर अध्यापक पूछते हैं कि सूर्य इतना गरम क्यों है। दिनेश सोचता है कि वहाँ हमेशा आग जलती रहती है, और रवि पूछता है कि तो वह आग किसने जलाई होगी? तब धरा बताती है कि सूर्य की गरमी आग के जलने से नहीं है; सूर्य ऐसी गैसों से बना है जो बहुत गरम होती हैं — यह उसकी मौसी ने उसे बताया था। अध्यापक कहते हैं: सही कहा! सूर्य मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम नाम की गैसों का एक विशाल (बहुत बड़ा) गोला है। साहिल को ये नाम बोलने में कठिनाई होती है, तो कुछ बच्चे हँस पड़ते हैं।
अध्यापक यह भी बताते हैं कि सूर्य चंद्रमा की तरह हमारी पृथ्वी के पास नहीं है, बल्कि बहुत दूर है — इसलिए वहाँ पहुँचना आसान नहीं।
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