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हमारा आदित्य

आदित्य-एल1

भारत के सूर्य मिशन आदित्य-एल1 के बारे में जानो।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 13 'हमारा आदित्य' में अध्यापक बताते हैं कि जैसे चंद्रमा के रहस्य हैं, वैसे ही सूर्य के भी रहस्य हैं। इन्हीं रहस्यों को जानने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने एक यान बनाया — आदित्य-एल 1। बच्चे एक साथ उत्सुकता से बोल पड़ते हैं: आदित्य-एल 1!

वाणी पूछती है कि क्या यह चंद्रयान जैसा ही है? अध्यापक कहते हैं — हाँ, आदित्य-एल 1 भी चंद्रयान की तरह एक यान है। इसका काम है सूर्य के बारे में जानकारी जुटाना: सूर्य किस समय कैसा होता है, वह कितना गरम है, और उसकी गरमी का असर आस-पास और हमारी पृथ्वी पर कैसा पड़ता है।

पूर्वा पूछती है कि क्या यह सूर्य पर पहुँच गया? अध्यापक बताते हैं — सूर्य पर तो नहीं, पर सूर्य से एक सुरक्षित दूरी पर रुककर इसने सूर्य के अद्भुत चित्र भेजे। उस दूरी पर सूर्य की गरमी इसे कोई हानि नहीं पहुँचा सकती, और यह वहीं से समय-समय पर सूर्य के चित्र लेता रहता है।

आदित्य-एल 1 का प्रक्षेपण (अंतरिक्ष में भेजना) 2 सितंबर 2023 को हमारे देश के भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन — इसरो — ने किया था। आदित्य-एल 1 ने सूर्य के ग्यारह रंगों वाले चित्र भेजे, जो देखने में बहुत सुंदर हैं; अध्यापक ये चित्र कक्षा में दिखाते हैं। किताब बताती है कि यह लगभग 5 वर्ष तक सूर्य के चित्र खींचता रहेगा, और हमारे वैज्ञानिक उनका अध्ययन करके सूर्य के रहस्यों का पता लगाएँगे।

सिल्विया पूछती है कि यह और क्या करेगा? अध्यापक बताते हैं कि सूर्य पर गैसों की टकराहट से बहुत बड़े विस्फोट होते हैं, जिनसे बहुत ऊर्जा निकलती है। जैसे धरती पर आँधियाँ आती हैं, वैसे ही सूर्य की ऊर्जा से भी आँधियाँ आती हैं। आदित्य-एल 1 में लगे उपकरण (यंत्र) हमें इन आँधियों के बारे में और पृथ्वी पर उनके असर के बारे में जानकारी देंगे।

आदित्य-एल 1 चंद्रयान जैसा एक यान है, जिसे हमारे वैज्ञानिकों ने सूर्य के रहस्य जानने के लिए बनाया; इसरो ने इसका प्रक्षेपण किया; यह सूर्य पर नहीं गया, बल्कि सुरक्षित दूरी से सूर्य के चित्र लेता है — इसने सूर्य के ग्यारह रंगों वाले चित्र भेजे।

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