हमारा आदित्य
सूर्य और हम
जानो कि सूर्य हमारे जीवन के लिए क्यों ज़रूरी है।
आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 13 'हमारा आदित्य' में दीपक कहता है कि उसने आज तक सूर्य का चित्र नहीं देखा। रफ़त ने चाँद का, पृथ्वी का, चंद्रयान का और अपने बचपन का चित्र देखा है, पर सूरज का कभी नहीं। दिनेश कहता है कि उसके पिताजी ने उसे सूर्य की ओर देखने से मना किया है।
अध्यापक कहते हैं: आपके पिताजी ने सही कहा। सूर्य को कभी भी सीधे आँखों से देखने का प्रयास मत करना — यह आँखों के लिए ठीक नहीं है। इसलिए अध्यापक बच्चों को आदित्य-एल 1 के भेजे हुए सूर्य के ग्यारह रंगों वाले चित्र दिखाते हैं। सूर्य को देखना हो, तो ऐसे चित्र देखो — सीधे सूर्य की ओर कभी नहीं।
सूर्य से हमें एक बहुत काम की चीज़ भी मिलती है — सौर ऊर्जा। किताब के पृष्ठ 169 पर एक घर का चित्र है, जिसकी छत पर नीले रंग की पट्टियाँ (सोलर पैनल) लगी हैं और ऊपर सूरज चमक रहा है। ये पट्टियाँ सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा बनाती हैं। 'सौर' का अर्थ है सूर्य का — सौर ऊर्जा यानी सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा।
किताब बताती है कि सौर ऊर्जा सूर्य के प्रकाश से मिलने वाली अक्षय ऊर्जा है। अक्षय यानी जो कभी समाप्त न हो। हम जितनी चाहें सौर ऊर्जा लें, सूर्य का प्रकाश कल फिर मिलेगा — यह खत्म नहीं होती।
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