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हमारा आदित्य

उपसर्ग

उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाओ।

कुछ छोटे शब्दांश (शब्द के टुकड़े) किसी शब्द के पहले जुड़कर एक नया शब्द बना देते हैं। इन्हें उपसर्ग कहते हैं। जिस शब्द में उपसर्ग जुड़ता है, उसे मूल शब्द कहते हैं।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 13 में (पृष्ठ 166) चार शब्द दिए हैं: प्रभाव, अभियान, विशाल, सुप्रभात। इनमें प्र, अभि, वि और सु उपसर्ग हैं, और भाव, यान, शाल, प्रभात मूल शब्द। यानी: प्र + भाव = प्रभाव, अभि + यान = अभियान, वि + शाल = विशाल, सु + प्रभात = सुप्रभात।

ये शब्द पाठ में भी आए हैं। बच्चे अध्यापक से 'सुप्रभात' कहते हैं — सु (अच्छा) + प्रभात (सुबह) = अच्छी सुबह। अध्यापक बताते हैं कि सूर्य गैसों का एक विशाल (बहुत बड़ा) गोला है, और आदित्य-एल 1 यह जानकारी जुटाता है कि सूर्य के ताप का प्रभाव (असर) पृथ्वी पर कैसा पड़ता है।

किताब 'स' उपसर्ग से दो नए शब्द बनाकर दिखाती है: स + रस = सरस (रस से भरा), और स + चित्र = सचित्र (चित्रों के साथ)। उपसर्ग हमेशा शब्द के पहले, यानी शुरू में, जुड़ता है।

उपसर्ग वह शब्दांश है जो मूल शब्द के पहले जुड़कर नया शब्द बनाता है: प्र + भाव = प्रभाव, अभि + यान = अभियान, वि + शाल = विशाल, सु + प्रभात = सुप्रभात, स + रस = सरस, स + चित्र = सचित्र।

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