बगीचे का घोंघा
कहानी के विशेषण
कहानी में आए विशेषण पहचानो।
किसी चीज़ के बारे में जो शब्द बताते हैं कि वह कैसी है — बड़ी, छोटी, लाल, लंबी — उसे उसकी विशेषता कहते हैं। ऐसे शब्दों को विशेषण भी कहते हैं। जैसे 'लाल चींटी' में 'लाल' बताता है कि चींटी कैसी है।
तुम्हारी किताब 'वीणा' के पाठ 2 'बगीचे का घोंघा' में घोंघा बगीचे से बाहर जो कुछ देखता है, वह किसी-न-किसी तरह ख़ास है। किताब के पृष्ठ 25 पर कहानी के आधार पर इनकी विशेषताएँ लिखनी हैं। पहली विशेषता किताब ने खुद भरी है: बच्चों के खेलने का मैदान — बहुत बड़ा, लंबा-चौड़ा।
कहानी में पत्थर बड़ा-सा था — इतना बड़ा कि घोंघे को लगा, यह कोई पहाड़ है। चींटियाँ लाल थीं, और वे अपने लंबे-पतले पाँवों से इधर-उधर आ-जा रही थीं।
खजूर का पेड़ इतना लंबा था कि मानो पूरे आसमान तक जाता था। और बड़ का पेड़ इतना बड़ा था कि घोंघा उसके एक छोर से दूसरे छोर तक देख भी नहीं पाता था।
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